राम मंदिर ट्रस्ट की 6 जुलाई की बैठक निर्णायक मोड़ पर, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य पर टिकी नजरें
Ram Mandir Trust's July 6 meeting at a decisive
अयोध्या। Ram Mandir Trust's July 6 meeting at a decisive, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की हलचल के बीच छह जुलाई को प्रस्तावित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक निर्णायक मानी जा रही है। इसमें ही ट्रस्ट के सचिव चंपतराय व सदस्य डा. अनिल कुमार मिश्र के भविष्य का फैसला होना है। कोई सदस्य दो तरीके से ही ट्रस्ट की सदस्यता से मुक्त हो सकता है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता राकेश पाठक बताते हैं कि ट्रस्ट डीड में किसी भी सदस्य को ट्रस्ट से बाहर करने की दो परिस्थितियां तय की गई हैं। पहली में संबंधित सदस्य को पद से त्यागपत्र देने के लिए ट्रस्ट की बैठक में ही एक माह का नोटिस देना होगा। नोटिस की अंतिम तिथि के बाद वह ट्रस्ट की सदस्यता से मुक्त हो माना जाएगा। दूसरी स्थिति में ट्रस्ट के 15 सदस्यों में दो तिहाई बहुमत से किसी भी ट्रस्टी की सदस्यता हमेशा के लिए खत्म की जा सकेगी।
इसके अंतर्गत बैठक में ट्रस्ट के विपरीत सदस्यों के किए गए कृत्यों को लेकर एक प्रस्ताव लाना होगा, जिस पर दो तिहाई बहुमत की मुहर लगनी आवश्यक है। प्रस्ताव पारित होने के बाद सदस्य को ट्रस्ट की सदस्यता से हाथ धोना पड़ेगा।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में केंद्र सरकार की ओर से आइएएस लोखंडे प्रशांत व राज्य सरकार के प्रमुख सचिव आइएसए संजय कुमार व अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी पदेन सदस्य हैं, जिनके पास मतदान का अधिकार नहीं है। इस वजह से किसी भी सदस्य को हटाने के लिए दो तिहाई यानि कम से कम आठ सदस्यों का एक मत होना जरूरी है। तभी इस प्रकार का कोई प्रस्ताव पास भी हो सकेगा।
तीसरी परिस्थिति सिर्फ चंपतराय के लिए है, वह महासचिव पद छोड़ कर भी आजीवन ट्रस्टी बने रहेंगे। जब तक कि वह ट्रस्ट की सदस्यता से त्यागपत्र न दे दें। अयोध्या बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जनार्दन दुबे बताते हैं कि ट्रस्ट के विरुद्ध कार्य करने पर ट्रस्ट की बैठक में ही एक प्रस्ताव लाकर इनको ट्रस्ट से हटाया जा सकता है।